चच्चा की अमेरिका यात्रा - १
एडविना की मृत्यु के बाद चच्चा अकेले तनहा पड़ गए। यकायक उम्र का तकाज़ा चच्चा के चेहरे पर साफ़ दिखने लगा था। इंग्लैंड की रानी के पर्सनल फिजिशियन ने चच्चा साहब का मुयायना किया - एक किडनी डॉक्टर ने भी चच्चा की जांच की किन्तु उन्हें अपनी गरलसखी की मौत का गम अंदर से खाये जा रहा था। विजय लक्ष्मी पंडित ने चच्चा की सौत डिकी मॉउन्टबेटन से चच्चा की तबियत के बारे में बातचीत की किन्तु डिकी बोले- चच्चा को सँभालने का माद्दा केवल एडविना में था। खैर ये बात कुछ समय में ही गलत साबित हुई।
नवंबर १९६१ में जॉन कैनेडी अमेरिका के राष्ट्रपति थे जब उन्होंने चच्चा को अमेरिका आने का न्योता दिया। चच्चा साहब इंदिरा को लिए न्यू यॉर्क उतरे जिधर केनेडी दम्पति उनकी आगवानी में तैयार मिले। जैकी केनेडी को देख चच्चा के चेहरे पर अरसे बाद चिरपरिचित मुस्कान आयी - अचकन पर लगा मुरझाया गुलाब का फूल यकायक दमकने लगा। न्यू यॉर्क से चच्चा और इंदिरा को वाशिंगटन लाया गया जिधर उन्होंने रात्रि भोज केनेडी दम्पति की मेजबानी में वाइट हाउस में किया । भारत में अमेरिकन राजदूत के अनुसार चच्चा साहब जैकी और उनकी बहन के बीच बैठे और उन्होंने अपना भोजन प्रेम पूर्वक किया - चेहरे की दमक देखते बनती थी । इसके बाद चच्चा साहब ने जैकी को भारत आने का न्योता दिया , कहा - अकेली आओगी तो और अच्छा लगेगा।
इस के पांच महीने बाद जैकी केनेडी अपनी बहन के साथ नई दिल्ली आयी जिधर चच्चा ने पर्सनली उनकी रन वे पट्टी कर आकर आगवानी की। उन्हें तीन मूर्ति भवन में शानदार पार्टी दी गयी - चच्चा साहब जैकी के साथ फूलो की गद्दी पर विराजमान हुए । जैकी की बहन ने लिखा है -चच्चा जी एक बेहद चार्मिंग जेंटलमैन है और बहुत गर्मजोशी से स्वागत करते है। इस यात्रा पर चच्चा ने जैकी के साथ होली भी खेली - उन्हें रंग लगाए। “ बलम पिचकारी तूने ऐसी मारी” गाना भी चच्चा ने सबसे पहले इस टैम गाया था- ऐसा गुहा जी का मानना है।
ऐसे थे रंगीले चच्चा हमाये - ऐसा प्रधान मंत्री देश को कभी नसीब ना होगा !
चच्चा की अमेरिकन यात्रा-२
जॉन केनेडी ने अपनी चच्चा से मुलाक़ात के विषय में लिखा है- चच्चा बड़े ठंडे हृदय के पुरुष है और ऐसे देश के हेड है जिनसे मिलना व्यर्थ रहा। स्वाभाविक सी बात है - किसी आदमी की लुगाई और साली से यदि कोई खुलेआम चोंच लड़ाए- कौन उसे पसंद करेगा। लेकिन चच्चा साहब पूर्व में भी अमेरिका में ऐसे ही कारनामे कर चुके है। सबसे फेमस है आइजनहॉवर की दावत जिस में चच्चा अमेरिकी राष्ट्रपति के फ़ार्म हाउस में दावत खा कर आये थे। इस पर अनेक कांग्रेसी नेता आजकल ट्विटर पर हवाई फायरिंग कर रहे है। इस यात्रा का ययार्थ क्या था?
१९४९ में चच्चा राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन के समय अमेरिका पधारे थे किंतु उस यात्रा का कोई मायने ना निकला था। ५० के दशक में चच्चा एशिया की दो कम्युनिस्ट पॉवर के हाथो में खेल रहे थे- रुस और चीन। पंचशील की उपज भी चच्चा के दिमाग़ की थी- हिन्दी चीनी भाई भाई। बाद में क्या हुआ सबको ज्ञात है।
वाशिंगटन डीसी का एयरपोर्ट है डुल्लेस एयरपोर्ट। ये एयरपोर्ट जॉन डुल्लेस के नाम पर है जो उस समय आइजनहॉवर का दाहिना हाथ माना जाता था। उपराष्ट्रपति निक्सन भी दिल्ली यात्रा करके गये थे और निक्सन/ डुल्लेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति को समझाया- चच्चा लॉजिकल रीज़न से नहीं समझते है- इन्हें इन पर्सन में बुला ख़ातिरदारी करो। क्या पता पिघल जाये।
इसी दौरान चच्चा ने आइजनहॉवर को युद्धप्रेमी तक करार दिया था- कोल्ड वॉर के समय।नतीजा अमेरिकी सदन ने भारत को मिलने वाली ऐड की रक़म में भारी कटौती करी- सोचिए १९५६ में मिलने वाली ७० मिलियन डॉलर की रक़म आधी रह गई। क्यों- केवल चच्चा के कम्युनिस्ट प्रेम के कारण। ख़ैर आइजनहॉवर ने चच्चा साहब को न्योता और अपने फ़ार्म हाउस में गैया भैंसिया दिखाई। आइजनहॉवर ने चौदह घंटे बात चीत के नोट्स भी लिए। किंतु नतीजा - सिफ़र। उस समय भारत की इकॉनमी हिचकोले खा रही थी- चीन बॉर्डर पर तैयार खड़ा था। अमेरिका दोनों सिरों पर मदद देने को तैयार था किंतु…..
इस पोस्ट में चच्चा के गौमांस भक्षण के बारे में भी जोड़ सकते थे किंतु वो चच्चा की पर्सनल चॉइस है क्या खाये और क्या ना खाये। ये बात दीगर है ऐसे गौमांस खाने वाले के वंशज आजकल ख़ुद को जनेऊधारी डिक्लर करते फिरते है।
केवल विदेश यात्रा और फ़ार्म हाउस के फ़ोटू होने से क्या साबित होता है। क्या कोई ये क्लियर करेगा चच्चा अमेरिका यात्रा से कितना इन्वेस्टमेंट, कितनी ऐड ,कितनी मदद लेके आये? या केवल अन्नानास की जड़ें लेके आये?

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