रविवार, 1 सितंबर 2019

#समाजवाद

#समाजवाद तब और अब
१९६०- ७० के दशक में एक शख़्स ऐसा हुआ करता था जो कागज़ों का पुलिंदा बगल में दबाए हुए जब संसद में प्रवेश करता था तो लोगो की सासे टग जाती थी कि न जाने आज किसकी शामत आने वाली है। मशहूर समाजवादी चिंतक और समाजवादी आंदोलन- #मधु_लिमये
वो जमाना था जब डॉक्टर लोहिया प्रधान मल्ल की तरह खम ठोंकते और सारे समाजवादी भूखे शेर की तरह सत्ता पक्ष पर टूट पड़ते और बोलती बंद कर देते।
एक बार इंदिरा गांधी ने लोकसभा में बजट पेश किया जो आर्थिक लेखानुदान था भाषण समाप्त होते ही मधु लिमये ने व्यवस्था का प्रश्न उठाना चाहा, लेकिन स्पीकर ने सदन को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया। मधु झल्लाते हुए उनके चैंबर में गए और बोले- आज बहुत बड़ा गुनाह हो गया है. आप सारे रिकॉर्ड्स मंगवा कर देखिए.मनी बिल तो पेश ही नहीं किया गया. अगर ऐसा हुआ है तो आज 12 बजे के बाद सरकार का सारा काम रुक जाएगा और सरकार का कोई भी महकमा एक भी पैसा नहीं ख़र्च कर पाएगा।
जब स्पीकर ने सारी प्रोसीडिंग्स मंगवा कर देखी तो पता चला कि धन विधेयक तो वाकई पेश ही नहीं हुआ था. वो घबरा गए क्योंकि सदन तो स्थगित हो चुका था। तब मधु ने कहा -ये अब भी पेश हो सकता है. आप तत्काल सभी नेताओं को बुलवाएं उसी समय रेडियो पर घोषणा करवाई गई कि संसद की तुरंत एक बैठक बुलवाई गई है. जो जहां भी है तुरंत संसद पहुंच जाए. संसद रात में बैठी और इस तरह धन विधेयक पास हुआ।
मधु लिमये की सादगी का आलम ये था कि उनके घर में न तो फ़्रिज था, न एसी और न ही कूलर. कार भी नहीं थी उनके पास. हमेशा ऑटो या बस से चला करते थे.
सादगी का आलम ये था कि उनके घर में न तो फ़्रिज था, न एसी और न ही कूलर,कार भी नहीं थी उनके पास हमेशा ऑटो या बस से चला करते थे.
एसी उन्होंने कभी लगाया नहीं. जब बाद में वो बीमार पड़े तो लोगों ने काफ़ी ज़िद की कि आपके यहाँ एसी लगवा देते हैं. लेकिन वो इसके लिए तैयार नहीं हुए.
एक बार 1000 रुपए का मनीऑर्डर आया उन्होंने डाकिये से पैसे तो ले लिए लेकिन मनीऑर्डर की रसीद देखि तो पता चला कि संसद में मधु लिमये ने चावल के आयात के सिलसिले में जो सवाल किया था उससे एक बड़े भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हुआ था और उसके कारण एक व्यापारी को बहुत लाभ हुआ था और उसने ही कृतज्ञतावश वो रुपए मधुजी को भिजवाए थे,मधु लिमये ने वो रुपए पोस्ट ऑफ़िस उन सज्जन को वापस भिजवा दिए।
उनकी राय थी कि सांसदों को पेंशन नहीं मिलनी चाहिए और उन्होंने न सिर्फ़ सांसद की पेंशन नहीं ली बल्कि अपनी पत्नी को भी कहा कि उनकी मृत्यु के बाद वो पेंशन के रूप में एक भी पैसा न लें. 1976 में जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान संसद का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया तब भी उन्होंने पांच साल पूरे होने पर लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया।जेपी,लोहिया, मधु लिमये का समाजवाद और आज उनके चेले लालू, मुलायम कहा का कहा पहुंच गया

#स्वतंत्र_पार्टी #पीलू_मोदी

सरकार के पूर्व रियासतों को दी जाने वाली #प्रिवीपर्स को समाप्त करने के बाद कुछ भूतपूर्व राजाओं ने #स्वतंत्र_पार्टी का गठन किया था।उस पार्टी से बहुत से सांसद लोकसभा में आये जिनमे से एक थे गुजरात के गोधरा से सांसद #पीलू_मोदी थोड़े मजाकिया, जिंदादिल और धीर गंभीर भी अंग्रेजी में माशाल्लाह।एक बार पीलू सदन में बोल रहे थे जेसी जैन उन्हें लगातार टोक रहे थे।पीलू मोदी ने झल्लाकर कहा स्टॉप बार्किंग (भौंकना बंद करो)जैन ने आपत्ति की कि उन्हें कुत्ता कहा जा रहा है। इस पर पीठासीन अधिकारी ने इस टिप्पणी को कार्यवाही से निकाल दिया। पीलू कहां चुप रहने वाले उन्होंने फिर कहा देन स्टॉप ब्रेयिंग (गधे की तरह रेंकना) जैन की समझ में नहीं।
पीलू और इंदिरा राजनीतिक विरोधी थे मगर निजी जीवन में मित्रवत. इंदिरा संसद में दिए गए पीलू मोदी के किसी भी भाषण को मिस नहीं करती थीं।अक्सर पीलू की स्पीच के बाद वह तारीफ से भरा नोट भी भेजतीं थी पीलू भी इसका जवाब देते और पीएम को भेजी जवाबी स्लिप के आखिरी में लिखते पीएम. पीएम क्यों. क्योंकि ये पीलू मोदी का शॉर्ट फॉर्म था। पीलू कई बार इंदिरा के सामने भी कहते-आई एम ए परमानेंट पीएम, यू आर ओनली टेंपेरेरी पीएम इंदिरा ये सुन मुस्कुरा देतीं।
पीलू मोदी की पत्रकारों से खूब छनती थी। इंदिरा गांधी संसद में बहस के दौरान अक्सर क्रॉसवर्ड पज़ल हल करती थी एक दिन ये पीलू मोदी को पता चल गया। लोकसभा में पत्रकार दीर्घा बालकनी में होती है. यानी सदन में कौन क्या कर रहा है, उसका पत्रकारों को एरियल व्यू मिलता है। उन्होंने अपने एक पत्रकार मित्र से कहा, अगली दफा जब इंदिरा ऐसा करें तो मुझे गैलरी से इशारा कर देना. अगली बारी जल्द आई. इशारा मिलते ही पीलू खड़े हुए और स्पीकर से कहा- सर प्वाएंट ऑफ़ ऑर्डर. ( ये एक वैधानिक टर्म है, जब कोई औचक महत्व का विषय आ जाए या कोई चीज मिस हो रही हो और उस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत हो। स्पीकर थे नीलम संजीव रेड्डी. उन्होंने पीलू से पूछा, व्हाट प्वाएंट ऑफ़ ऑर्डर. देयर इज़ नो मैटर इन फ़्रंट ऑफ़ हाउस।पीलू बोले-क्या कोई सांसद संसद में क्रॉसवर्ड पज़ल हल कर सकता है? यह सुनते ही इंदिरा गांधी के हाथ रुक गए,वह पीलू को घूरने लगीं बाद में पीलू को उन्होंने नोट भेज पूछा, तुम्हें कैसे पता चला? पीलू का जवाब था मेरे जासूस हर जगह हैं.
एक बार संसद की डिप्लोमेट गैलरी में वह वेनेज़ुएला की बेहद सुंदर डिप्लोमैट आई,बेगूसराय सांसद श्यामनंदन उनकी तरफ बार-२ देखने लगे. गलियारे में ही पीलू मोदी थे. इंदिरा के खास यूपी के नेता दिनेश सिंह से बात कर रहे थे. तभी पत्रकारों ने उन्हें इशारा कर श्याम की तरफ देखने को कहा। पल भर में ही पीलू माजरा समझ गए. वहीं से चिल्लाकर बोले, ‘श्याम वॉट आर यू डूइंग? श्याम बाबू झेंप गए. बाद में उन्होंने पीलू से पूछा-तुम्हें कैसे पता चला? पीलू का वही जवाब-मेरे जासूस हर जगह हैं। 

1969 में विपक्ष के सहयोग की जरुरत थी इंदिरा कई पार्टियों में अपने लिए समर्थन जुटा रही थीं। इस दौरान वह पीलू को अकसर बुलावा भेजतीं बातचीत के दौरान खुद चाय बनाकर सर्व करतीं।दो दफा तो पीलू इस बुलावे पर चले गए,मगर तीसरी बार संदेशा आया तो इनकार कर दिया। कुछ रोज बाद संसद के गलियारों में पीलू इंदिरा के सामने पड़ गए. इंदिरा ने तब पीलू से न आने की वजह पूछी. पीलू बोले,मैं जान बूझकर नहीं आया आपका व्यक्तित्व इतना आकर्षक है कि अगर तीसरी बार मिलता तो आपको सपोर्ट करने लगता. इंदिरा फिर मुस्कुरा दीं. और पीलू. वे ठहाका मारकर हंसने लगे। 
इंदिरा गांधी अक्सर यह आरोप लगाती रहती थीं कि उनकी सरकार को विदेशी ताकतें ध्वस्त करने में जुटी हैं। पीलू मोदी उनके कट्टर विरोधियों में होते थे। जब इंदिरा गांधी ने एक बार फिर यह आरोप लगाया तो वे अगले दिन वह जो कमीज पहनकर आए उस पर लिखा हुआ था कि मैं सीआइए का एजेंट हूं। इस पर संसद में जबरदस्त हंगामा हुआ।
आपातकाल पीलू मोदी को रोहतक जेल में रखा गया जो उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी का सबब था,वहाँ पश्चिमी स्टाइल के कमोड का न होना उन्होंने इंदिरा गाँधी को संदेशा भेज अपनी परेशानी बताई।उसी शाम बैठ कर पॉटी करने वाली जगह के दोनों ओर सिमेंट का प्लेटफ़ार्म बनवाया गया, ताकि पीलू को शौच क्रिया में कोई तकलीफ़ न हो। 
पीलू संसद के दोनों सदनों में भारी भरकम देह वाले सांसदों पर करीबी नजर रखते. उन्हें अपने भीम क्लब का मेंबर बताते. अकसर अपने गोल मटोल होने का खुद ही मजाक उड़ाते।


युगोस्लाविया - सोवियत संघ

  यदि आप कभी bosnia-herzegovina जाएंगे तब एक जगह आपको 9300 मुसलमानों की सामूहिक कब्र दिखेगी जहां उन सभी के नाम लिखे हैं दरअसल यह मुस्लिम कही...