इंदिरा गाँधी सरकार के नेतृत्व में लड़ा गया ७१ का युद्ध बांग्लादेश को जन्म देने वाला साबित हुआ था। भारत ने ना केवल युद्ध जीता बल्कि पाकिस्तानी फ़ौज के ९३ हज़ार सिपाही बंदी बनाये - पाकिस्तान का ५ हज़ार स्क्वायर मील का इलाका भारतीय सेना के कब्ज़े में था । पाकिस्तान की एक चौथाई वायु सेना भारत ने उड़ा दी थी - आधी पाकिस्तानी नेवी को डुबो दिया था - ईस्ट पाकिस्तान को बांग्लादेश बना दिया था और पाकिस्तानी खज़ाना पूरा खाली था । कुल मिलाकर भारत के पास तुरुप के सब पत्ते थे और पाकिस्तान के पास सौदा करने के लिए कुछ ना था। नोट करने वाली बात ये थी - जीतने के बाद इतना बड़ा इलाका वॉर ट्रॉफी के रूप में हमारे पास था - बांग्लादेश का बनना हमारे लिए मोरल विक्ट्री जैसा था - वो हमारे अधीन तो ना था।
रविवार, 9 जुलाई 2023
1971 का युद्ध
पाकिस्तानी जनरल यन्या खान के जाने के पश्चात् ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो और उनकी लड़की बेनज़ीर भुट्टो उर्फ़ पिंकी भुट्टो शिमला पहुंचे । तारिख २८ जून १९७२ जहाँ इंदिरा गाँधी ने खुद अब्बा भुट्टो और पिंकी को रिसीव किया। पिंकी ताज़ा ताज़ा अठरह साल की हुई थी। अब्बा भुट्टो को ये एग्रीमेंट लेके वापस जाना बहुत जरुरी था - नया नया राष्ट्रपति बना था - यन्या खान के हगे को बटोरने अपने साथ अपनी लड़की को भी लाया था । कारण - अब्बा भुट्टो ने चच्चा नेहरू पर बहुत रिसर्च करवाई थी और सब पाकिस्तानी सलाहकारों ने कहा - जनाब , चच्चा नेहरू अपने साथ अपनी लड़की इंदिरा को साथ लेके हर विदेशी दौरे पर जाते थे - इसके चलते आप भी ये चाल आजमा कर देखें। और ये कदम भुट्टो के लिए नायब साबित हुआ।
अब्बा भुट्टो ने अपनी लड़की से कहा - मेरे पास भारत को देने के लिए कुछ भी नहीं है और मुझे नहीं ज्ञात किस तरह से ये एग्रीमेंट पर दस्खत होंगे। पांच दिन तक चले इस शिमला एग्रीमेंट में पहले चार दिन कुछ फैसला ना निकला। भारत और इंदिरा गाँधी की मांग थी - पाकिस्तान कश्मीर से अपना दावा वापस ले और भी कुछ डिमांड रखी गयी। भुट्टो का कहना था - कदम बा कदम बात करते है , ऐसे होलसेल वाला पैकेज मत सामने रखिये।
लेकिन इन चार दिनों के दौरान भारतीय मीडिया , भारतीय पब्लिक और नेताओ के समक्ष कुछ और ही खिचड़ी पक कर परोसी जा रही थी।
आखिर ऐसा क्या हुआ कि पांचवे दिन भारतीय खेमे ने अपनी शर्ते वापस ले ली और लुटे पिटे पाकिस्तान को उनकी शर्तो पर एग्रीमेंट साइन करके दे दिया।
पिंकी भुट्टो के शिमला आने से लेके पांचवे दिन तक भारतीय मीडिया और जनमानस में केवल वो ही वो छा ही रही। हिमाचल भवन में रह रही पिंकी जहाँ भी जाती , भारतीय पब्लिक उसे देखने भीड़ लगा लेती - ट्रैफिक जैम हो जाता। डॉल म्यूजियम , डांस प्रोग्राम , फ्रूट पैकेज फैक्ट्री आदि , जहाँ जहाँ भी पिंकी भुट्टो जाती - वही यही माहौल रहता । न्यूज़ रिपोर्टर एग्रीमेंट को छोड़ पिंकी के इर्द गिर्द घुमते । नेशनल न्यूज़ में पिंकी के कपडे , सलवार कमीज ही छा ही रही। आज भी हम सब भारतीय हिन्ना रब्बानी खार को देख बौरा जाते है - आज भी कुछ ना बदला है।
खैर तीस जून की रात हुई रात्रि भोज में पिंकी भुट्टो सिल्क साड़ी पहने इंदिरा के साथ टेबल पर बैठी। इंदिरा सब कुछ भूल केवल पिंकी को निहारती रही । अब्बा भुट्टो ने पिंकी को पहले ही बता दिया था - तुम्हारा अटेंशन और डायवर्सन हमारे लिए एक दवा है - ऐसे ही सब का फोकस डिगाती रहो। इंदिरा ने पिंकी को साड़ी बाँधने के गुर सिखलाये । शिमला वही जगह थी जहाँ जिन्नाह और लियाक़त अली खान ने पाकिस्तान बनवाया था। जुलाई २ को अब्बा भुट्टो ने पिंकी से कहा - सामान बांधो , यहाँ से चलते है , दाल नहीं गल रही । लेकिन फिर ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो ने एक घंटा अकेले में इंदिरा से बात की - पिंकी को बताया - मैंने इंदिरा को उनके राजनैतिक विरोधियो का वास्ता दिया , इंदिरा अपने पर्स को खंगालती रही और मैं एक घंटे उन्हें मनाता रहा। नतीजा ये हुआ - ३ जुलाई को एग्रीमेंट पर दोनों देशो ने मुहर लगाई।
एग्रीमेंट के नतीजे थे -
- भारत पाकिस्तान को ५ हज़ार स्क्वायर मील जगह वापस देगा।
- कश्मीर का मुद्दा एकॉर्ड से बाहर हो गया।
- दोनों मुल्को में नए व्यापार और दुसरे सौदे होंगे।
- भारत ९३ हज़ार बंदियों को इज्जत से रखेगा और ट्रायल के बाद इन्हे लौटा देगा। भारतीय पक्ष ने वो क़ैदी बाइज्जत लौटा भी दिए थे।
- भारत के सिपाही जो पाकिस्तान में क़ैद थे - उनपर कोई बात ना हुई।
- लाइन ऑफ़ cease फायर को ही लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल माना जाएगा किन्तु इस पर पाकिस्तान बाद में मुकर गया।
भारतीय दृश्टिकोण ख़ास तौर पर कोंग्रेसी कोण इस बात पर ये था - भुट्टो ने इंदिरा के पैरो में गिर मुआफी मांगी , भीख मांगी और इंदिरा ने दयाकर उसे सब कुछ लौटा दिया - आखिर इंदिरा दुर्गा अवतार जो थी इस युद्ध में।
ये सौदा भुट्टो के लिए संजीवनी बूटी से कम ना था - सब कुछ लेके - मुफ्त का व्यापार मिला कर वे पाकिस्तान लौटे जहाँ उसका स्वागत हीरो के माफिक हुआ। अब्बा भुट्टो ने पिंकी को वापसी में बतलाया- ९३ हज़ार फ़ौजियो के बारे में वो चिंतित नहीं है क्योंकि देर सवेर इंदिरा को उन्हें रिहा करना ही पड़ेगा। हुआ भी यही। अब्बा भुट्टो का होमवर्क बड़ा अच्छा था।
कुल मिलाकर पिंकी के लटके झटके और इंदिरा का वो एक घंटा अकेले भुट्टो के साथ बिताना भारी पड़ गया।
सन्दर्भ - बेनज़ीर भुट्टो की आत्मकथा
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