सोमवार, 21 सितंबर 2015

आज थोड़ा सा इतिहास ज्ञान हो जाए.**********======================================क्या“आपजानतेहैं, कि मुगल अफ़ज़ल खान ने अपनी 63 पत्नियों की हत्या कर डाली ताकि उसकी पत्नियाँ दूसरी शादी ना कर लेकोई शासक अपनी 63 पत्नियों को सिर्फ़ इसलिये मार डाले कि कहीं उसके मरने के बाद वे दोबारा शादी न कर लें… है ना आश्चर्यजनक बात!!!
कर्नाटक के बीजापुर में बीजापुर-अठानी रोड पर लगभग 5 किलोमीटर दूर एक उजाड़ स्थल पर पाँच एकड़ में फ़ैली यह ऐतिहासिक कत्लगाह है। “सात कबर” (साठ कब्र का अपभ्रंश) ऐसी ही एक जगह है।
इतिहास कुछ इस प्रकार है कि एक तरफ़ औरंगज़ेब और दूसरी तरफ़ से शिवाजी द्वारा लगातार जारी हमलों से परेशान होकर आदिलशाही द्वितीय (जिसने बीजापुर पर कई वर्षों तक शासन किया) ने सेनापति अफ़ज़ल खान को आदेश दिया कि इनसे निपटा जाये और राज्य को बचाने के लिये पहले शिवाजी पर चढ़ाई की जाये। हालांकि अफ़ज़ल खान के पास एक बड़ी सेना थी, लेकिन फ़िर भी वह ज्योतिष और भविष्यवक्ताओं पर काफ़ी भरोसा करता था। शिवाजी से युद्ध पर जाने के पहले उसके ज्योतिषियों ने उसके जीवित वापस न लौटने की भविष्यवाणी की। उसी समय उसने तय कर लिया कि कहीं उसकी मौत के बाद उसकी पत्नियाँ दूसरी शादी न कर लें, इसलिये सभी 63 पत्नियों को मार डालने की योजना बनाई।_अफ़ज़ल खान अपनी सभी पत्नियों को एक साथ बीजापुर के बाहर एक सुनसान स्थल पर लेकर गया। जहाँ एक बड़ी बावड़ी स्थित थी, उसने एक-एक करके अपनी पत्नियों को उसमें धकेलना शुरु किया, इस भीषण दुष्कृत्य को देखकर उसकी दो पत्नियों ने भागने की कोशिश की लेकिन उसने सैनिकों को उन्हें मार गिराने का हुक्म दिया। सभी 63 पत्नियों की हत्या के बाद उसने वहीं पास में सबकी कब्र एक साथ बनवाई।_पहली दो लाइनों में 7-7 कब्रें, तीसरी लाइन में 5 कब्रें तथा आखिरी की चारों लाइनों में 11 कब्रें बनी हुई दिखाई देती हैं . वह बावड़ी भी इस कब्रगाह से कुछ दूर पर ही स्थित है। अफ़ज़ल खान ने खुद अपने लिये भी एक कब्र यहीं पहले से बनवाकर रखी थी। _हालांकि उसके शव को यहाँ तक नहीं लाया जा सकालेकिन इससे यह भी साबित होता है कि वह अपनी मौत को लेकर बेहद आश्वस्त था, भला ऐसी मानसिकता में वह शिवाजी से युद्ध कैसे लड़ता? मराठा योद्धा शिवाजी के हाथों अफ़ज़ल खान का वध प्रतापगढ़ के किले में 1659 में हुआ।_यदि आप इससे अभी तक अनभिज्ञ थे तोअन्य मित्रों को भी अवगत कराएँ ... _/|\_-
जब आप भारत की राजधानी दिल्ली में अगर कभी घूमने आएँ तब आपको पता चलेगा कि आप "शाहजहां" रोड़ से निकलकर "अकबर" रोड़ पर पहुँच जायेंगे | आगे जाकर "बाबर" रोड़ पर मुड जायेंगे | फिर "हुमायं" रोड़ पर सीधे चले जाइयेगा | गोल चक्कर मिलेगा जहाँ से आप "तुगलक" लेन में घुस जायेंगे | "औरंगजेब" रोड़ पर आगे बढीयेगा | "सफदरजंग" रोड़ आ जाएगी , |इसके बाद तुगलाकबाद एवं जामिया नगर होते हुए कुतुबमीनार तक जाइए.... और जब इस सूफियाने माहौल में दम घुटने लगे तो "सराय कालेखाँ" होते हुए "निजामुद्दीन" रेलवे स्टेशन से अपने शहर की रेलगाड़ी में बैठिएगा और घर वापस आ जाइयेगा ....... लेकिन कहीं भी आपको नही लगेगा कि यह वही युगों युगों से साधू संतों , ऋषि मुनियों और सिद्ध पुरूषों द्वारा भुखे प्यासे जंगलों में रह कर तप कर करके बचाई हुई भारत भुमि है ? बड़े बड़े राजा , महाराजा , और योद्धाओं की महिनों तक भुखे रह रहकर , बहुत ही दुख , कष्ट , यातनाएं सह सहकर बचाई हुई भारत भुमि है ? क्या यही वो बड़े बड़े वीर शहीदों के बलिदान , अपने जीवन की कुर्बानीयाँ देकर बचाया हुआ भारत है ??? उन महापुरूषों का कहीं नामों निशान नही मिलेगा आपको... बस केवल देश के लुटेरों , आक्रमण कारीयों , गददारों और भारत व सनातन/हिन्दू धर्म के दुश्मनों की ही स्मृतियाँ मिलेंगी... आपको ऐसा लगेगा जैसे दिल्ली में नही बल्कि पाकिस्तान के किसी शहर में घुस गए हैं... !!! यह केवल तथाकथित नेहरू+गाँधी खानदान एवं वामपंथी इतिहासकारों की ही देन है..
छोटी सी कहानी प्रस्तुत है ,
शायद पटवारी वर्ग भी इससे अछूता नहीं है ,सरकार की नित्य नए प्रयोगों ने भू-अभिलेख के कामों का मजाक बना दिया है आज हमारे कामों का आकलन इस आधार पर किया जाता है:-
कुछ नन्हीं चींटीयां 🐜🐜🐜🐜 रोज अपने काम पर समय से आती थी और अपना काम अपना काम समय पर करती थी.....
वे जरूरत से ज्यादा काम करके भी खूब खुश थी.......
जंगल के राजा शेर 🐅 नें एक दिन चींटीयों को काम करते हुए देखा, और आश्चर्यचकित हुआ कि चींटीयां बिना किसी निरीक्षण के काम कर रही थी........

उसने सोचा कि अगर चींटीयां बिना किसी सुपरवाईजर के इतना काम,
कर रही थी तो जरूर सुपरवाईजर के साथ वो अधिक काम कर सकती थी.......
उसनें काक्रोच 🐞 को नियुक्त किया जिसे सुपर्वाईजरी का 10 साल का अनुभव था,
और वो रिपोर्टों का बढ़िया अनुसंधान करता था .....
🐞 काक्रोच नें आते ही साथ सुबह आने का टाइम, लंच टाईम और जाने का टाईम निर्धारित किया, और अटेंडेंस रजिस्टर
📖
बनाया...
..उसनें अपनी रिपोर्टें टाईप करने के लिये, सेकेट्री भी रखी....
उसनें मकड़ी
🐙
को नियुक्त किया जो सारे फोनों
📞
का जवाब देता था और सारे रिकार्डों को मेनटेन करता था......
🐅 शेर को काक्रोच 🐞 की रिपोर्टें 📋 पढ़ कर बड़ी खुशी हुई, उसने काक्रोच से कहा कि वो प्रोडक्शन एनालिसिस करे और, बोर्ड मीटिंग में प्रस्तुत करने के लिये ग्राफ 📊📈 बनाए......
इसलिये काक्रोच को नया कम्प्यूटर
💻
और लेजर प्रिंटर
📠
खरीदना पड़ा.........
और उसनें आई टी डिपार्टमैंट संभालने के लिए मक्खी 🐝 को नियुक्त किया........
🐜चींटी जो शांति के साथ पूरा करना चाहती थी इतनी रिपोर्टों
📝
को लिखकर और मीटिंगों से परेशान होने लगी.......
🐅 शेर ने सोचा कि अब वक्त आ गया है कि जहां चींटी काम करती है वहां डिपार्टमेंट का अधिकारी नियुक्त किया जाना चाहिये....
उसनें झींगुर
🐛
को नियुक्त किया, झींगुर ने आते ही साथ अपने आॅफिस के लिये कार्पेट और ए.सी. खरीदा.....
नये बाॅस झींगुर को भी कम्प्यूटर
💻
की जरूरत पड़ी और उसे चलाने के लिये वो अपनी पिछली कम्पनी में काम कर रही असिस्टंट को भी नई कम्पनी में ले आया.........
🐜🐜चींटीयां जहां काम कर रही थी वो दुःख भरी जगह हो गयी जहां सब एक दूसरे पर आदेश चलाते थे और
📢
📢
चिल्लाते रहते थें.....
🐛
.झींगुर ने शेर को कुछ समय बाद बताया कि आॅफिस मे टीमवर्क कमजोर हो गया है और माहौल बदलने के लिए कुछ करना चाहिये......
🐜चींटीयों के डिपार्टमेंट की रिव्यू करते वक्त शेर ने देखा कि पहले से उत्पादकता बहुत कम हो गयी थी.......
उत्पादकता बढ़ाने के लिये शेर ने एक प्रसिद्ध कंसलटेंट को नियुक्त किया.......
उल्लू नें चींटीयों के विभाग का गहन अघ्ययन तीन महीनों तक किया फिर उसनें अपनी 1200 📒 पेज की रिपोर्ट दी जिसका निष्कर्ष था कि विभाग में बहुत ज्यादा लोग हैं.....
जो कम करने की आवश्यकता है......
सोचिये शेर 🐅 ने नौकरी से किसको निकाला....???
............
नन्हीं चींटीयों को 🐜🐜🐜🐜......
क्योंकि उसमें “ नेगेटिव एटीट्यूड, टीमवर्क, और मोटिवेशन की कमी थी.......

केवल उत्पादकता बढाने के लिए कर्मचारियों (चीँटियों) पर नित्य नये प्रयोग हो रहे हैं और जिसका खामियाजा सिर्फ कर्मचारियों को ही उठाना पङ रहा हैं... भले ही वाे अपना काम कितनी ही ईमानदारी से करें....
समस्या सारी आपके सामने है हल भी आपके पास है लेकिन दूरदर्शी शासन आपकी बातें सुनने को तैयार नहीं है


स्वर्गीय बी आर चोपड़ा और रवि चोपड़ा के धारावाहिक "महाभारत" (1988) के सेट का एक दृश्य जो धारावाहिक के सबसे अन्तिम सीन की शूटिंग के बाद कैमरे में कैद किया गया था.


https://www.facebook.com/vishaal1947/videos/728172670621022/
सरदार पटेल जी ने भारत के मुसलमानो को बहुत पहले ही पहचान लिया था! वीडियो देखें!!
सरदार पटेल जी का भारत के मुसलमानो को जवाब ............!!!
Original speech

https://www.facebook.com/vishaal1947/videos/728559147249041/

युगोस्लाविया - सोवियत संघ

  यदि आप कभी bosnia-herzegovina जाएंगे तब एक जगह आपको 9300 मुसलमानों की सामूहिक कब्र दिखेगी जहां उन सभी के नाम लिखे हैं दरअसल यह मुस्लिम कही...