सोमवार, 15 मई 2023

स्वतंत्र भारत का पहला घोटाला #जीप_घोटाला

स्वतंत्र भारत का पहला घोटाला #जीप_घोटाला

जीप खरीद घोटाला आजाद भारत का पहला बड़ा सरकारी घोटाला था. चूंकि उस घोटाले को दबा दिया गया था, इसलिए इसके साथ ही देश में भ्रष्टाचार की मजबूत नींव पड़ गई,घोटालेबाजों का काम भी आसान हो गया।
ब्रिटेन में भारत के तत्कालीन हाई कमिश्नर वी.के कृष्ण मेनन पर सन् 1949 में जीप घोटाले का गंभीर आरोप लगा. हंगामा हुआ तो केंद्र सरकार ने इसकी प्रारंभिक जांच के लिए एक उच्चस्तरीय #समिति बनाई. जांच कमेटी ने इसे घोटाला माना. न्यायिक जांच की सिफारिश की, पर जांच नहीं हुई.
प्रतिपक्ष ने जब जांच की मांग पर जोर दिया तो सत्ताधारी कांग्रेस ने कह दिया कि आप लोग इसे अगले चुनाव में मुददा बना सकते हैं. और यह घोषणा कर दी कि #जीप घोटाले के इस मामले को बंद कर दिया गया है.
हद तो तब हो गई जब 3 फरवरी, 1956 को कृष्ण मेनन केंद्रीय मंत्री बना दिए गए. घोटाला तब हुआ था जब मेनन लंदन में भारतीय उच्चायुक्त थे. कश्मीर में पाकिस्तानी घुसपैठ की घटना की पृष्ठभूमि में ब्रिटेन से भारतीय सेना के लिए अत्यंत जरूरी जीप और हथियार खरीदने का भार कृष्ण मेनन को सौंपा गया था.
दोनों ही खरीदों के लिए ब्रिटेन की विवादास्पद #कंपनियों से मेनन ने खुद ही लिखित समझौते कर लिए. उन्होंने ऐसा सरकारी प्रक्रियाओं को नजरअंदाज करके किया. किसी उच्चायुक्त को ऐसे समझौते करने का अधिकार नहीं था।
खरीद समझौते के कागज पर इस देश के संबंधित अफसरों को हस्ताक्षर करने थे. औपचारिकता पूरी किए बिना भारी धनराशि अग्रिम के रूप में दे दी गई, पर पहली खेप के रूप में जो 155 जीपें भारत पहुंचीं भी, तो यह पाया गया कि जीप बंदरगाह से गैराज तक चल कर पहुंचने लायक ही नहीं थी. पंद्रह सौ जीपों के लिए एक लाख 72 हजार पाउंड कंपनी को अग्रिम दे दिए गए थे.
जबकि इतनी कीमत में अमेरिका और कनाडा से नई जीप खरीदी जा सकती थी पर उनके ऑफर नजरअंदाज कर दिए गए।मज़े की बात यह थी कि एक अज्ञात ब्रिटिश कंपनी अंटी मिस्तांट्स जिसकी कुल पूंजी केवल600 पाउंड्स थी उस यह सप्लाई करने का अनुबंध मिला।
65 % अग्रिम राशि और 20% डिलीवरी से पहले और शेष 15% बाद में चुकाए जाने तय हुए। रक्षा मंत्रालय द्वारा इन जीपो को रिजेक्ट करने के बाद जब सौदा निरस्त का दबाव बनाया गया तो मेनन ने उपरोक्त कंपनी से संपर्क स्थापित ना हो पाने की वजह बताई।
इसके बाद एक और कंपनी एस सी के एजेंसीज से दुबारा 1000 जीप सप्लाई करने का अनुबंध किया गया और देश को पिछले भुगतान का नुक़सान झेलना पड़ा। नेहरू ने इतनी बड़ी राशि के नुक़सान को भूलने को कहा और मेनन को बचा लिया।
कृष्णा मेनन एक वामपंथी थे और नेहरू से अच्छी मित्रता होना इसकी एकमात्र उपलब्धि थी।इस जीप घोटाले ने ही आजादी के तत्काल बाद ही यह बात साबित कर दी कि राजनीतिक या अन्य तरह की तरक्की पाने के रास्ते में कोई गंभीर घोटाला भी इस देश में किसी समर्थ व्यक्ति के लिए बाधक नहीं है
लोगों ने समझ लिया कि वे कोई भी घोटाला-महा घोटाला करके बच सकते हैं, अगर तब जीप घोटाले के लिए जिम्मेदार लोगों को तब सजा मिल गई होती तो शायद आज इतने बड़े -२ घोटाला भी नहीं होते






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