शनिवार, 13 मई 2023

 #इजरायल और #अरब_युद्ध - 1967

5 जून 1967 सुबह 07:40 इजरायल के तेल अवीव में रक्षा मंत्रालय के कार्यालय में प्रत्येक व्यक्ति सांस रोके बैठा था क्योंकि हमले के क्षण क़रीब आ चुका था. इसराइली युद्धक विमानों की बमबारी की सफलता इस बात पर निर्भर करती थी कि वह दुश्मन को सोचने का मौका ही न दें और बहुत जल्दी मिस्र से शुरुआत करके अरब वायुसेना के सभी ठिकानों को नष्ट कर दें।

इससे पहले जब 1956 में इसराइल ने ब्रिटेन और फ्रांस के साथ एक गुप्त समझौते के तहत मिस्र पर हमला किया था तो उस समय #अमरीका ने न केवल इसराइल को फटकार लगाई बल्कि उसे उन क्षेत्रों से बाहर जाने पर मजबूर कर दिया था जिन पर इसराइल कब्जा कर चुका था. इसीलिए इस बार इसराइल की कोशिश कि उसे अमरीका का समर्थन हासिल हो और हुआ भी।

#ह्वाइट_हाउस में एक राय थी कि इजरायल को अपने दुश्मनों को परास्त करने का मौका देना चाहिए। इसके जरिए इजरायल और अरब देशों के बीच सीमा को सुनिश्चित करने के साथ ही शरणार्थियों के मुद्दे को सुलझाने में मदद मिलेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति जॉनसन ने इसराइल का समर्थन दिया और ये संकेत भी दिया कि अगर उपयुक्त हुआ तो अमरीका शायद अपने सहयोगियों की नौसेना के साथ तिरान जलडमरूमध्य खोलने के लिए हमला कर सकता है.

इसराइली वायुसेना इन हमलों की तैयारी कई वर्षों से कर रही थी. इस उद्देश्य के लिए जासूसी विमानों की मदद से उन्होंने अरब वायुसेना के सभी ठिकानों को पहले से समझ लिया था। मिस्र और अन्य अरब देशों के विपरीत इसराइलियों ने अपनी पूरी तैयारी की थी. उन्होंने मिस्र, जॉर्डन और सीरिया के हवाई अड्डों की पूरी तस्वीर प्राप्त करने के लिए सैकड़ों जासूसी मिशन भेजे.थे.
प्रत्येक पायलट के पास टारगेट की एक किताब थी जिसमें उसकी लोकेशन और सुरक्षा संबंधी विवरण मौजूद थे. गोलीबारी के दौरान उन्होंने रेडियो कॉल सुनकर बड़े अरब कमांडरों की आवाज़ों को पहचान करने के लिए एक सिस्टम बना लिया था.
ये एक बड़ी सफलता थी #मिस्र का फ़ील्ड मार्शल आमिर और मिस्र का सैन्य शीर्ष नेतृत्व एक हवाई अड्डे पर बैठक कर रहे थे और सत्र शुरू होने को था कि इसराइली युद्धक विमानों ने बम गिराना शुरू कर दिया.
फ़ौजी जनरल इतने हैरान थे कि उनके मन में पहला विचार ये आया कि किसी ने मिस्र से बगावत कर दी.
आमिर अपना जहाज़ उड़ाने में सफल हो गए, लेकिन एक ऐसा समय भी आया कि उन्हें विमान उतारने के लिए कोई जगह नहीं मिल रही थी क्योंकि मिस्र के सभी हवाई अड्डों पर हमला किया गया था.
इजरायल ने कहा कि उसने मिस्र की वायुसेना को तबाह कर दिया है। लड़ाई के पहले ही दिन 400 लड़ाकू विमान मार गिराए गए जिसमें 300 विमान मिस्र के थे जबकि सीरिया के 50 लड़ाकू विमान शामिल थे।
उस दिन इसराइल ने #जॉर्डन और #सीरिया की सेना के ज़्यादातर हवाई अड्डे नष्ट कर दिए थे. आसमान पर इसराइल का कब्ज़ा था
जॉर्डन ने भी मॉर्शल लॉ लगा दिया। इजरायल के खिलाफ युद्ध की घोषणा करने से पहले सीरिया ने अपनी सेना मिस्र के कमांड में देने का फैसला किया।सीरिया के साथ साथ इराक, कुवैत, सूडान अल्जीरिया, यमन और फिर सऊदी अरब भी मिस्र के समर्थन में कूद पड़े



#अरब देशों के लड़ाई में कूदने के बाद मामला और गहरा गया। इजराएल-जॉर्डन मोर्चे पर जबरदस्त लड़ाई चल रही थी। सीरियाई विमानों ने तटीय शहर हैफा को निशाना बनाया। तो जवाब में इजरायल ने #दमिश्क एयरपोर्ट को निशाना बनाया।
इजरायली सैनिकों ने गाजा के सरहदी शहर खान यूनिस पर हमला कर मिस्र और फिलिस्तीन के सैनिकों पर कब्जा कर लिया।
इजरायली हमले के फौरन बाद इजरायल की सीमा पर अरब मुल्कों की फौजों का जमावड़ा शुरू हो गया था। लेकिन जमीनी लड़ाई में भी इजरायली फौजों ने न केवल इन्हें शिकस्त दी, बल्कि गाजा पट्टी भी अपने कब्जे में कर ली थी।
इसराइल ने जार्डन के शाह हुसैन को चेतावनी दी कि युद्ध में शामिल न हों लेकिन यरूशलम में लड़ाई की शुरुआत के आधे दिन बाद ही जॉर्डन सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी। दक्षिण में इसराइल की ज़मीनी सेना सिनाई में तेज़ी से आगे बढ़ रही थी. उधर मिस्र की सेना भी बहादुरी से लड़ रही थी, लेकिन वो इसराइली सैनिकों की तरह प्रशिक्षित, लचीली और फ़ुर्तीली नहीं थी.
काहिरा में सेना मुख्यालय में कमांडर डरे हुए थे. जनरल मान चुके थे कि युद्ध आधा हारा जा चुका है और यह मिस्र के लिए सबसे ख़राब हार थी.लेकिन बाहर सड़कों पर लोग जश्न मना रहे थे क्योकि वह की मिडिया में एक भरम फैलाया गया की 86 इसराइली विमान मार गिराए गए और मिस्र के टैंक इसराइल में घुस गए हैं.

6 दिन तक चली लड़ाई में इजरायल के सिर्फ एक हजार सैनिक मारे गए लेकिन अरब देशों को करीब 20 हजार सैनिकों को खोना पड़ा। लड़ाई के दौरान इजरायल ने मिस्र से गाजा पट्टी और सिनाई प्रायद्वीप, जार्डन से वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम, सीरिया से गोलन हाइट की पहाड़ियों को छीन लिया। मौजूदा समय में सिनाई प्रायद्वीप मिस्र का हिस्सा है, जबकि वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी फिलिस्तीन के इलाके मे हैं।
11 जून को युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर हुए और लड़ाई खत्म हो गई।

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