मंगलवार, 6 जून 2023

धौलपुर में किताबें

 

धौलपुर में एक सरकारी महाराणा #स्कूल है लगभग 115 साल पुराना, जहा ३ कमरे सालो से बंद पड़े थे और इन 115 सालों में कई प्रधानाचार्य और तमाम स्टाफ आये गए, पर किसी ने भी इन कमरों को खोल कर नहीं देखा। सबका यही कहना था इनमें पुराना कबाड़ भरा पड़ा है क्यों फालतू दिमाग लगाए। .
कुछ महीने पहले महाराणा स्कूल के #प्रधानाचार्य रमाकांत शर्मा ने जिज्ञासा वश तीन कमरों को खुलवाकर देखा तो वहां मौजूद #खजाना देख लोगों को होश उड़ गये। असल में इन कमरों से इतिहास की ऐसी धरोहरें रखी गई थीं, जो आज बेशकीमती हैं। इन कमरों में मिला लाखों #दुर्लभ_पुस्तकों का भंडार था
ऐसी किताबें मिली हैं जो कई सदी पुरानी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ये किताबें बेशकीमती हैं। इन किताबों में कई ऐसी किताबें हैं, जिनमें स्याही की जगह #सोने के पानी का इस्तेमाल किया गया है।।1905 में इन किताबों के दाम 25 से 65 रुपये थी। जबकि उस दौरान सोना 27 रुपये तोला था। ऐसे में मौजूदा समय में इन 1-1 किताब की कीमत लाखों में आंकी जा रही है।


अधिकांश #किताबें 1905 से पहले की हैं। इनमें से एक किताब 3 फीट लंबी है। इसमें पूरी दुनिया और देशों की रियासतों के नक्शे छपे हैं। खास बात यह है कि किताबों पर गोल्डन प्रिंटिग है। इसके अलावा भारत का राष्ट्रीय एटलस 1957 भारत सरकार द्वारा मुद्रित, वेस्टर्न-तिब्बत एंड ब्रिटिश बॉडर्र लेंड, सेकड कंट्री ऑफ हिंदू एंड बुद्धिश 1906, अरबी, फारसी, उर्दू और हिंदी में लिखित पांडुलिपियां, ऑक्सफोर्ड एटलस, एनसाइक्लोपीडिया, ब्रिटेनिका, 1925 में लंदन में छपी महात्मा गांधी की सचित्र जीवनी द महात्मा भी इन किताबों में निकली है।



इतिहासकार गोविंद शर्मा बताते हैं – महाराजा उदयभान सिंह को किताबें पढ़ने का शौक था। ब्रिटिशकाल में वे जब भी लंदन और यूरोप की यात्रा पर जाते थे, तब वहां से किताबें जरूर लाते थे। उन्होंने खुद भी अंग्रेजी में सनातन धर्म पर एक पुस्तक लिखी थी, जिसका विमोचन मदन मोहन #मालवीय ने किया था। #धौलपुर राज परिवार की शिक्षा में इतनी रुचि थी कि उन्होंने बीएचयू के निर्माण में भी मदन मोहन मालवीय को बड़ी धनराशि प्रदान की थी।
इतिहासकार इस अनोखे खजाने को लेकर बहुत उत्साहित हैं। उनका कहना है कि इन किताबों को सहेज कर रखना जरूरी है, ताकि भविष्य में इन किताबों से छात्रों को बहुत अहम जानकारी मिले।

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