गुरुवार, 27 अप्रैल 2023

अमृतसर_आ_गया

 भीष्म साहनी ने एक कहानी लिखी है #अमृतसर_आ_गया

इस कहानी में इसका वर्णन है की जब मुसलमान अकेला होता है तब वो कितना शांतिप्रिय और सेकुलर होने का बहाना करता है ..लेकिन जैसे ही वो अपने स्वधर्मी मुसलमानों के साथ होता है तब वो कितना खतरनाक, खूंखार और इस्लामवादी हो जाता है....
क्या भारत क्या पाकिस्तान इनके लिए सिर्फ और सिर्फ इनकी कौम ही सबसे बड़ी है।
शाहनवाज भुट्टो फज्र की नमाज़ पढ़ रहे थे,तभी खबर आई- मुबारक हो बेटा हुआ है,मियां भुट्टो ने कमरे में पहुंचकर बच्चे को हौले से उठाया उसकी कान में नमाज पढ़ी.फिर नाम रखा- #जुल्फिकार. मुसलमानों के चौथे खलीफा हजरत अली की तलवार जुल्फिकार के नाम पर। जो आगे पाकिस्तान का PM बना...
पाक के ताकतवर नेताओं में एक #प्रधाममंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की वो आखिरी रात बहुत ही दर्दनाक थी ====
जब भुट्टो को फांसी दी गई, तब ब्रिगेडियर राहत लतीफ़ रावलपिंडी जेल के इंचार्ज थे, जब गार्ड ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को फांसी देने ले जाने आए, तो वह नशे की दवा की वजह से गहरी नींद में थे।
जब गार्ड आए तो वह गहरी नींद में थे. उन्होंने उनको उठने और फांसी के लिए चलने को कहा लेकिन वो उठ नहीं पाए. फिर उन्हें स्ट्रेचर पर रखा गया. जो गार्ड उन्हें लेने गए थे, उनमें जेल सुपरिटेंडेंट भी थे। उन्होंने उनसे कहा कि इस वक़्त आपको ख़ुद से उठ जाना चाहिए।
उनको जब फांसी दी गई तो उससे एक दिन पहले उन्हें खुद भी नहीं पता था कि उनकी फांसी की सजा होगी यह सब काम पाकिस्तानी जनरल द्वारा जल्दबाजी में हुए थे




फांसी से कुछ देर पहले जब सुरक्षाकर्मियों ने भुट्टो के हाथ पीछे कर बांधने की कोशिश की तो उन्होंने उसका विरोध किया। आखिरकार उनके हाथों में जबरदस्ती रस्सी बांधी गई। उसके बाद उन्हें एक स्ट्रेचर पर लिटा कर कुछ दूर ले जाया गया।
भुट्टो को फांसी पर लटकाने के लिए #जल्लाद पहले से ही तैयार था। जैसे ही घड़ी में देर रात 2 बजकर 4 मिनट हुए, जल्लाद ने भुट्टो के कान में कुछ फुसफसाया और लिवर दबा दिया। भुट्टो आधे घंटे तक फांसी के फंदे पर लटके रहे। इसके बाद एक डॉक्टर ने भुट्टो की जांच की और उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद खुफिया एजेंसी ने एक फोटोग्रफर को भुट्टो की तस्वीर लेने भेजा उसे ब्रीफ दिया गया था कि वो भुट्टो के #लिंग की तस्वीर खींचकर लाए. वे लोग देखना चाहते थे कि भुट्टो का खतना हुआ भी है या नहीं।
फोटो देखने के बाद इस बात की पुष्टि हुई कि एक सच्चे मुसलमान की तरह भुट्टो का भी खतना हुआ था।
फिर मिलिट्री ट्रक में आधी रात को ही एयरपोर्ट से शव को उनके पुश्तैनी गांव में दफनाया गया।
आमतौर पर होने वाली फांसी के तीन घंटे पहले ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को फांसी दी गई।

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