रविवार, 22 मई 2022

भारत के महान संगीतकार पंडित ओमकारनाथ ठाकुर और इटली का तानाशाह मुसोलिनी

 इटली का तानाशाह मुसोलिनी के जीवन प्रसंग में एक ऐसी घटना है जिसे जानकर आप हिंदुत्व पर गर्व करेंगे

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इटली में बसे हिंदुओं ने भारत के महान संगीतकार पंडित ओमकारनाथ ठाकुर को इटली में आमंत्रित किया था और उस वक्त इटली के तानाशाह मुसोलिनी ने पंडित ओमकारनाथ ठाकुर के सम्मान में डिनर का आयोजन किया था।
मुसोलिनी की कई प्रेमिकाओं में एक प्रेमिका बंगाली थी. जिसे संगीत का बहुत अच्छा ज्ञान था. उसने कई बार मुसोलिनी से कहा कि उसकी अनिद्रा का इलाज संगीत में है तो वो इसे मजाक मानता ।
वो बंगालीन ठाकुर जी से परिचित थी,उसने मुसोलिनी के इस अनिद्रा बीमारी के बारे में बता दिया था
डिनर टेबल पर ही मुसोलिनी ने हिंदू धर्म का मजाक बनाते हुए कहा ओमकारनाथ ठाकुर जी मैंने सुना है कि आप के देवता भगवान श्री कृष्ण जब बांसुरी बजाते थे तब तमाम गाय उनके पास दौड़कर चली जाती थी यह कैसे सच हो सकता है आपके हिंदू धर्म में कितना गप्प लिखा गया है ?
क्योंकि मुसोलिनी बहुत क्रूर तानाशाह था इसीलिए वहां 2 मिनट के लिए सन्नाटा पसर गया
उसके बाद पंडित ओमकारनाथ ठाकुर ने बेहद शांति से कहा यहां ना बासुरी है ना गाये हैं लेकिन मैं आपको हिंदू धर्म और हिंदू धर्म के संगीत की थोड़ी झलक दिखाता हूं
पंडित ओमकारनाथ ठाकुर जी ने डाइनिंग टेबल पर ही तमाम कप और गिलास में पानी भरकर एक जलतरंग जैसा उपकरण बनाया और राग पूरिया बजाना शुरू किया वातावरण में संगीत की ऐसी मीठी धुन पसरी की मुसोलिनी गहरी निद्रा में चला गया और नींद की वजह से वह टेबल पर इतना जोर से गिरा कि उसका सर के टेबल पर टकरा गया और 10 मिनट तक वह गहरी नींद में सोता रहा वहां उपस्थित हर सज्जन मदहोशी की अवस्था में चले गए थे




फिर जैसे ही पंडित ओमकारनाथ ठाकुर ने राग पुरिया बजाना बंद किया मुसोलिनी नींद से जगा और पंडित जी के पैरों को पकड़कर माफी मांगी और कहा सच में आपके हिंदू धर्म में जो लिखा गया है वह सच है
उसके बाद मुसोलिनी ने पंडित ओमकारनाथ ठाकुर को इटली नहीं छोड़ने की अपील किया उन्हें रोम में ही बसने की अपील किया और उन्हें बड़ा पद के साथ-साथ काफी बड़ी जागीर देने की पेशकश थी लेकिन पंडित ओमकारनाथ ठाकुर ने मना कर दिया
मित्रों यह है हमारे हिंदुत्व की ताकत यह हमारे धर्म की ताकत 💪💪💪💪
मुसोलिनी जैसे तानाशाह के सामने पंडित ओमकारनाथ ठाकुर ने अली मौला अली मौला या अली या अली या हुसैन या हुसैन या अल्लाह या अल्लाह का जाप नहीं किया उन्होंने एक ऐसा हिंदुत्व का राग बजाया जिसे मुसोलिनी भी हिंदू धर्म का लोहा मान गया
सोचता हूं आजकल के फर्जी कथावाचक होते तब मुसोलिनी के सामने अली मोला अली मोला अली मोला करते और मुसोलिनी भी उन्हें पिछवाड़े लात मार कर कहता यह तेरा अली मौला अली मौला सेकुलर लुंज पुंज हिंदू ही सुन सकते हैं मैं नही।

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