शनिवार, 9 अप्रैल 2022

भारतीय रेजीमेंट की शान Lieutenant General हनुत सिंह राठौड़

 राजस्थान बाड़मेर की मट्टी में पैदा हुए महावीर चक्र से सम्मानित,भारतीय रेजीमेंट की शान=== Lieutenant General हनुत सिंह राठौड़ उम्र भर का अविवाहित रहे।

उन्होंने अपना अंतिम जीवन आध्यात्मिक खोज में बिताया वे एक सच्चे संत योद्धा थे.
1949 में एनडीए में दाखिल हुए और सेकंड लेफ्टिनेंट के तौर पर नियुक्त हुए। हनुत सिंह की अगुवाई में पूना हॉर्स रेजीमेंट में 1965 और 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के बहुत सारे टैंक नष्ट किए थे। वे पोलो के टॉप कैडेट थे।


1965 की लड़ाई में बैटल ऑफ अासल में 264 पाकिस्तानी टैंकों के साथ पाकिस्तान ने खेमकरण पर कब्जा कर लिया। यह सबसे बड़ी टैंकों की लड़ाई मानी जाती है। हनुत सिंह ने अपने दो साथियों हरबक्श सिंह और गुरबख्श सिंह के साथ मिलकर ऐसी रणनीति बनाई कि पाकिस्तान के 200 टैंक नष्ट करके पाकिस्तान का पूरा ऑपरेशन फेल कर दिया।
1971 की लड़ाई में भी हनुत सिंह की 47 इन्फेंट्री ब्रिगेड को शकरगढ़ सेक्टर में बसंतर नदी के पास तैनात किया गया। दुश्मन देश द्वारा लैंडमाइन से भरे हुए एरिया के बावजूद खतरनाक युद्ध में भारतीय सेना ने उनके नेतृत्व में 48 टैंक ध्वस्त किए। इसी युद्ध के बाद वे महावीर चक्र से सम्मानित हुए।

आप यह जानकर हैरान होंगे कि इस रेजीमेंट की वीरता को देखते हुए दुश्मन देश ने भी इस रेजीमेंट को फख्र ए हिंद के खिताब से नवाजा। यहां एक बात और उल्लेखनीय है कि 1986 में ब्रॉसटेक्स्ट युद्धाभ्यास शुरू किया गया। उनकी अगुवाई में सेना से गहन युद्धाभ्यास करवाया जाता। हर तरह के युद्ध की प्लानिंग और ट्रेनिंग दी जाती। पाकिस्तान ने इसे अपने पर होने वाले हमले की तैयारी समझा। पश्चिम के डिप्लोमेट्स के अनुसार यह दक्षिणी एशिया का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास था। भारत के इस जबरदस्त युद्धाभ्यास से सारा विश्व हैरान था।



किसी तरह कूटनीति से इस अभ्यास को रुकवाया गया। दरअसल सेना का मकसद कुछ और था अगर वह युद्धाभ्यास ना रुकवाया हो जाता तो भारत का आज नक्शा कुछ और होता।

अपने सेवाकाल में उन्होंने सेना में उच्च आदर्शों की मिसाल कायम की।1982 में भी सिक्किम की 17 माउंटेन डिवीजन के इंचार्ज बने। उनकी बहादुरी, कर्तव्य निष्ठा एवं दूर दृष्टि देखिए कि उन्हें वहां से जाते समय एक मोमेंट दिया गया ,जिस पर लिखा था जितना सैनिकों के लिए आपने 1 साल में किया उतना किसी अफसर ने 20 साल में भी नहीं किया ।
देश सेवा के लिए हनुत सिंह उम्र भर का अविवाहित रहे। उनकी प्रेरणा से उनकी यूनिट के बहुत सारे जवानों ने देश की खातिर विवाह ना करने का निश्चय किया। उनके उच्च आध्यात्मिक विचारों ने सेना के जवानों को बहुत प्रभावित किया। उनके लिखे टैंकों की लड़ाई पर दस्तावेज आज भी मिलिट्री अकादमी में पढ़ाए जाते हैं।


एक और किस्सा जो बहुत प्रसिद्ध है कि 1987 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें फोन किया। वह साधना में बैठे थे। उन्होंने अपने सहायक से कहा कि वह पूजा के बाद बात कर पाएंगे। यह बात प्रधानमंत्री राजीव गांधी को बहुत बुरी लगी। 1988 में इस महान योद्धा की सारी उपलब्धियों को दरकिनार करके उनके जूनियर विश्वनाथ शर्मा को भारत का अगला थल सेना अध्यक्ष बना दिया गया उसने इस बात का भी बिल्कुल बुरा नहीं माना।
1991 में रिटायर होने के बाद देहरादून के बाल शिव योगी से प्रभावित होकर वह वहीं बस कर आध्यात्मिक साधना में लीन रहे। 2015 में ध्यान अवस्था में ही समाधि में ब्रह्मलीन हो गए।

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