इंग्लैंड की एक प्रसिद्ध घटना है जो #Law_School में छात्रों को केस स्टडी के तौर पर पढ़ाई जाती है।
1883 में एक अमीर ऑस्ट्रेलियाई वकील एक यॉट (yacht) खरीदता है ये यॉट इंग्लैड की थी और डिलीवरी ऑस्ट्रेलिया में करनी थी। 4 लोगो का दल क्रू मेंबर में जहाज का कैप्टन टॉम डडली, 2 सहायक एडविन स्टीफ़न, एडमंड ब्रुक्स और एक 17 वर्षीय केबिन बॉय उस यॉट को ले कर निकलता हैै। मई में जहाज इंग्लैंड से निकलता है और जुलाई में कुछ ऊंची लहरों में जहाज डूब जाता है।जैसे तैसे चारो क्रू मेंबर अपनी जान एक लाइफबोट पर बचाते हैं। जल्दबाजी में 2 शलजम के डिब्बों को छोड़ कर और कोई कुछ नही ला पाते। वहां से जमीन 1100 किलोमीटर दूर थी जैसे तैसे 3 दिन बीत गए। किसी ने कुछ नही खाया। फिर कैप्टेन ने एक शलजम का कैन खोला और सबको खाने को दिया।
अगले 2 दिन खाना नसीब नही हुआ। सबसे ज्यादा पीने के पानी की चिंता थी। फिर एक समुद्री कछुआ पकड़ा। सबने उसका खून पिया और मांस खाया। अगले दिन दूसरा कैन भी खत्म हुआ। अब इन्हें प्यास भी लगी और भूख से बुरा हाल। 17 वर्षीय केबिन बॉय प्यास बर्दाश्त नही कर पाया और मना किये जाने के बाद भी समुद्र का पानी पी लिया। इससे उसकी तबीयत बिगड़ जाती है। 19 दिन में 4 लोगों ने सिर्फ़ बस 2 कैन शलगम और एक कछुआ खाया था। बहुत प्यासे थे। बुरी तरह थके और निराश।
तभी जहाज का कैप्टेन एक प्रस्ताव देता है कि हममें से किसी को मरना होगा ताकि बाक़ी लोग उसका भोजन कर ज़िंदा रह पाए या तो कोई खुद ब खुद अपनी कुर्बानी दी या हम लॉटरी करते हैं।
ब्रूक्स इस बात से नाराज हो जाता है और किसी भी तरह की लॉटरी या हत्या में भाग लेने से मना कर देता है। स्टीफ़न को यह आईडिया अच्छा लगता है। केबिन बॉय बीमार पड़ रहता है सहमति देने की शक्ति नही होती उसमे। वो कहता है ईश्वर ही हमारी रक्षा करेगा।
1 दिन यूँ ही बीत जाता है कैप्टेन फिर से यही प्रस्ताव दुहराता है। इस बार स्टीफ़न दृढ़ता से राजी हो जाता है और सिग्नल करता है कि 17 वर्षीय बीमार कैबिन बॉय को ही मार दिया जाए। ब्रूक्स इसमे भाग नही लेना चाहता पर उसकी असहमति से कोई फ़र्क नही पड़ता है।
कैप्टेन डडली अपने चाकू से 17 वर्षीय केबिन बॉय को मार देता है। फिर तीनो मिलकर पहले उसका खून पीते हैं। अगले 4 दिनों तक वो उसका मांस खाते हैं। 4 दिनों के बाद एक जर्मन जहाज उन्हें बचा लेता है।
जब कहानी इंग्लैंड पहुंचती है तो पूरे न्यायायिक जगत में हड़कंप मच जाता है। उन पर मुकदमा चलाया जाता है। ब्रूक्स को मासूम समझ कर रिहा कर दिया जाता है। डडली और स्टीफ़न को मृत्युदंड दिया जाता है पर जनता की सहानुभूति की वजह से उन्हें फांसी नही दी जाती।
अपने बचाव में डडली और स्टीफ़न कहते हैं -भूख के कारण सब मर जाते अगर वो ऐसा नही करते।उन्होंने लॉटरी भी करने की कोशिश की ताकि अपराध बोध ना रहे।डडली, स्टीफ़न, ब्रूक्स शादी शुदा थे। उनके परिवार थे बच्चे बीवी जो उन पर निर्भर थे। केबिन बॉय अविवाहित और अनाथ था। वो बीमार था और शायद वैसे भी मर जाता। इसलिए केबिन बॉय को चुना गया।
1883 में एक अमीर ऑस्ट्रेलियाई वकील एक यॉट (yacht) खरीदता है ये यॉट इंग्लैड की थी और डिलीवरी ऑस्ट्रेलिया में करनी थी। 4 लोगो का दल क्रू मेंबर में जहाज का कैप्टन टॉम डडली, 2 सहायक एडविन स्टीफ़न, एडमंड ब्रुक्स और एक 17 वर्षीय केबिन बॉय उस यॉट को ले कर निकलता हैै। मई में जहाज इंग्लैंड से निकलता है और जुलाई में कुछ ऊंची लहरों में जहाज डूब जाता है।जैसे तैसे चारो क्रू मेंबर अपनी जान एक लाइफबोट पर बचाते हैं। जल्दबाजी में 2 शलजम के डिब्बों को छोड़ कर और कोई कुछ नही ला पाते। वहां से जमीन 1100 किलोमीटर दूर थी जैसे तैसे 3 दिन बीत गए। किसी ने कुछ नही खाया। फिर कैप्टेन ने एक शलजम का कैन खोला और सबको खाने को दिया।
अगले 2 दिन खाना नसीब नही हुआ। सबसे ज्यादा पीने के पानी की चिंता थी। फिर एक समुद्री कछुआ पकड़ा। सबने उसका खून पिया और मांस खाया। अगले दिन दूसरा कैन भी खत्म हुआ। अब इन्हें प्यास भी लगी और भूख से बुरा हाल। 17 वर्षीय केबिन बॉय प्यास बर्दाश्त नही कर पाया और मना किये जाने के बाद भी समुद्र का पानी पी लिया। इससे उसकी तबीयत बिगड़ जाती है। 19 दिन में 4 लोगों ने सिर्फ़ बस 2 कैन शलगम और एक कछुआ खाया था। बहुत प्यासे थे। बुरी तरह थके और निराश।
तभी जहाज का कैप्टेन एक प्रस्ताव देता है कि हममें से किसी को मरना होगा ताकि बाक़ी लोग उसका भोजन कर ज़िंदा रह पाए या तो कोई खुद ब खुद अपनी कुर्बानी दी या हम लॉटरी करते हैं।
ब्रूक्स इस बात से नाराज हो जाता है और किसी भी तरह की लॉटरी या हत्या में भाग लेने से मना कर देता है। स्टीफ़न को यह आईडिया अच्छा लगता है। केबिन बॉय बीमार पड़ रहता है सहमति देने की शक्ति नही होती उसमे। वो कहता है ईश्वर ही हमारी रक्षा करेगा।
1 दिन यूँ ही बीत जाता है कैप्टेन फिर से यही प्रस्ताव दुहराता है। इस बार स्टीफ़न दृढ़ता से राजी हो जाता है और सिग्नल करता है कि 17 वर्षीय बीमार कैबिन बॉय को ही मार दिया जाए। ब्रूक्स इसमे भाग नही लेना चाहता पर उसकी असहमति से कोई फ़र्क नही पड़ता है।
कैप्टेन डडली अपने चाकू से 17 वर्षीय केबिन बॉय को मार देता है। फिर तीनो मिलकर पहले उसका खून पीते हैं। अगले 4 दिनों तक वो उसका मांस खाते हैं। 4 दिनों के बाद एक जर्मन जहाज उन्हें बचा लेता है।
जब कहानी इंग्लैंड पहुंचती है तो पूरे न्यायायिक जगत में हड़कंप मच जाता है। उन पर मुकदमा चलाया जाता है। ब्रूक्स को मासूम समझ कर रिहा कर दिया जाता है। डडली और स्टीफ़न को मृत्युदंड दिया जाता है पर जनता की सहानुभूति की वजह से उन्हें फांसी नही दी जाती।
अपने बचाव में डडली और स्टीफ़न कहते हैं -भूख के कारण सब मर जाते अगर वो ऐसा नही करते।उन्होंने लॉटरी भी करने की कोशिश की ताकि अपराध बोध ना रहे।डडली, स्टीफ़न, ब्रूक्स शादी शुदा थे। उनके परिवार थे बच्चे बीवी जो उन पर निर्भर थे। केबिन बॉय अविवाहित और अनाथ था। वो बीमार था और शायद वैसे भी मर जाता। इसलिए केबिन बॉय को चुना गया।

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