ईरान का नाम पहले पर्शिया था .. वहाँ इस्लाम का कोई वजूद तक नही था .. सिर्फ पारसी लोग रहते थे ... उनके खूब बड़े बड़े अग्नि देवता के मन्दिर थे ..बाद में पर्शिया पर मुसलमानों ने हमला किया और खूब कत्लेआम मचाया .. जो जिन्दा बचे वो तलवार के डर से इस्लाम कुबूल कर लिए और जिन्हें धर्म प्यारा था वो शहीद हो गये ...
एक छोटी सी नाव में आठ पुरुष और कुछ महिलाये, और कुछ बच्चे अपनी पवित्र आग को लेकर समुद्र के रास्ते से भाग निकले .. उन्हें पता ही नही था की वो किधर जा रहे है .. कई दिनों तक समुन्द्र में चलने के बाद उन्हें जमीन नजर आया .. वो जगह था गुजरात के वलसाड जिले का संजान बंदरगाह ... वो लोग वही उतर गये ..
चूँकि वो लोग थके थे इसलिए स्थानीय लोगो ने उन्हें खाना आदि दिया .. फिर जब कुछ दिन रहने के बाद भी ये लोग कही जा नही रहे थे वो वहाँ के राजा ने सोचा की इन्हें मै कैसे बताऊ की मेरे राज्य में आपके लिए जगह नही है .. तो उसने एक दूध से भरा हुआ गिलास उनके पास भेजा ... पारसियों का सरदार बहुत होशियार था .. उसने उस गिलास में एक चम्मच चीनी डालकर वापस भेज दिया ...
यानी राजा कहना चाहता था की मेरे राज्य में जगह नही है .. तो पारसियों ने कहा की जैसे दूध में चीनी घुलमिल जाती है और एक बूंद दूध बाहर नही गिरता वैसे ही हम पारसी आप हिन्दुओ के साथ घुल मिलकर रहेंगे ..
राजा को ये जबाब बेहद पसंद आया और उसने उदवाडा में उन्हें रहने के लिए जगह दे दिया .. बाद में पारसी लोग नवसारी और मुंबई, अहमदाबाद में भी बसे
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